दिल्ली: बिल्डिंग बाय-लॉज का उल्लंघन बना 'मौत का जाल'; भ्रष्टाचार और मिलीभगत से बढ़ रहे अवैध निर्माण
Delhi: Violation of Building By-laws Becomes a 'Death Trap'
नई दिल्ली। कभी चोरी का डर तो कभी सामान रखने के लिए दिल्ली में बिल्डिंग उपनियमों (By-Laws) का खुलकर उल्लंघन हो रहा है। विवेक विहार जैसी नामचीन कॉलोनी में इसकी वजह से नौ लोगों की जान चली गई।
दिल्ली में एक ईंट लगाने पर MCD के बिल्डिंग विभाग के कर्मचारी निर्माण रोकने और गिराने तक पहुंच जाते हैं, लेकिन जब बात बड़े-बड़े रिहायशी आवासीय क्षेत्रों की आती है तो निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखे बंद हो जाती हैं।
सभी रिहायशी परिसरों में खुलेआम Building By-Laws का उल्लंघन होता है, लेकिन मिलीभगत और भ्रष्टाचार के कारण इस पर कार्रवाई नहीं होती। नियोजित आवासीय परिसर में ज्यादातर निर्माण वैसे तो नक्शा पास कराकर ही होते, लेकिन असली खेल बिल्डिंग का कंप्लीशन सर्टिफिकेट और बाद इसकी जांच के लिए होता है।
दिल्ली में एकीकृत Building By-Laws हैं। इसी के तहत ही मकानों के निर्माण और मरम्मत की अनुमति दी जाती है। नियम है कि जो नक्शे पास हैं, उसके 10 प्रतिशत नक्शों की हर वर्ष जांच हो, लेकिन यह जांच खानापूर्ति ही साबित होती है।
क्योंकि जांच अक्सर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। अगर, समय रहते एमसीडी इस तरह की इमारतों से जेलनुमा जालियों की जांच करें तो इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकती है।
लाखों निर्माण और कुछ सैकड़ों के ही नक्शे पास
दिल्ली में हर वर्ष हजारों की संख्या में निर्माण होते हैं, लेकिन नक्शे पास होने की मात्रा मात्र गिनती भर है। एमसीडी के ईज ऑफ डूइंग पोर्टल के अनुसार पिछले पांच वर्ष में 21,000 नक्शे पास हुए। जबकि दिल्ली में लाखों की मात्रा में निर्माण होते हैं।
एमसीडी हर वर्ष 70-75 हजार निर्माण तो वह है जो अवैध निर्माण के लिए चिह्नित करती है। जबकि निगम कर्मियों और अलग-अलग एजेंसियों की मिलीभगत से लाखों की संख्या में अवैध निर्माण होते हैं।
दिल्ली में 2000 से अधिक अनधिकृत काॅलोनियां और 50 लाख से अधिक निर्माण इस बात की गवाही भी देते हैं। अगर एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई की होती तो यह काॅलोनियां नहीं बसी होतीं।
छत पर ताला लगाना है गलत, सीढ़ी है इमरजेंसी एग्जिट
अक्सर बिल्डर फ्लैट और DDA फ्लैट में छत को ऊपर वाली मंजिल के लोग ही अपना अधिकार समझते हैं। ऐसे में वहां पर गेट लगाकर ताला लगा देते हैं। इसकी दो वजह होती हैं, एक तो छत पर अपना कब्जा रखना होता है जबकि दूसरा कारण सुरक्षा भी होता है।
ताकि कोई व्यक्ति छत के जरिये नीचे न आ जाए। हालांकि सुरक्षा और अपने कब्जे के लिए लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से यह कार्य करते हैं लेकिन विशेषज्ञ इसे गलत मानते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीढ़ियां आपातकालीन प्रवेश और निकास होती है। ऐसे में किसी भी स्थिति में इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए।
दिल्ली में नियोजित काॅलोनियों में ये है गैरकानूनी
- पार्किंग में घरेलू सहायिका के लिए कमरे का निर्माण करना।
- पार्किंग में पोटा केबिन रखकर कमरों का निर्माण करना।
- तय मात्रा से ज्यादा आवासीय परिसर बनाना।
- छज्जों, शाफ्ट और सेटबेक में जाली लगाना।
- सीढ़ियों का साइज छोटा करना।
चुप है निगम, नहीं दी कोई रिपोर्ट
दिल्ली में नौ लोगों की मौत पर एमसीडी ने चुप्पी साध ली है। संपत्ति का नक्शा पास था या नहीं? आखिरी बार निगम के अधिकारियों ने कब बिल्डिंग का निरीक्षण किया था? कब नोटिस दिया था या नहीं? इन सवालों पर एमसीडी चुप है।
एमसीडी के प्रेस एवंं सूचना निदेशक अनिल यादव से इस संंबंध में जानकारी मांगी गई लेकिन कोई जवाब नहीं आया। जिसका सीधा अर्थ है कि एमसीडी अपने भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने में जुटी हुई है।
यह रिहायशी परिसर हैं। जेलनुमा जाली लगाना पूरी तरह से गलत हैं। पहले तो इस तरह की जाली लगाने का प्रविधान ही नहीं है। सेटबैक खाली रहना चाहिए ताकि हवा का वेंटिलेशन भी रहे। इसको किसी भी तरह से कवर करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। साथ ही छत का ताला भी नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि सीढ़ी एक आपातकालीन द्वार होता है, जिसमें व्यवधान किसी भी स्थिति में नहीं होना चाहिए।